मंगलवार, 12 जुलाई 2011

भारतीय हिमनदों का दायरा 40,563 वर्ग किमी.

हिमालय के हिमनद यानी ग्‍लेसियर बहुमूल्‍य राष्‍ट्रीय एवं वैश्विक संसाधन हैं जो ध्रुवीय क्षेत्र के बाहर सबसे बड़ा बर्फ का केंद्र हैं। यह वैश्विक जलवायु को नियंत्रित करते हैं तथा उत्‍तर भारत की ज्‍यादातर बारहमासी नदियों को पानी उपलब्‍ध कराते हैं तथा जलवायु परिवर्तन का महत्‍वपूर्ण संकेतक हैं। तथापि पानी का यह स्रोत स्‍थायी नहीं है क्‍योंकि ग्‍लसियल यानी हिमनदीय आयाम जलवायु के साथ बदल जाते हैं। इसलिए हिमालयी बर्फ और हिमनदों के विस्‍तार में भावी बदलाव को समझने के लिए सही विज्ञान का उपयोग करना अनिवार्य हो गया है।
अब तक हिमालय के हिमनदों पर बहुत कम अध्‍ययन हुए हैं तथा ये कुछ ही हिमनदों तक सीमित रहे हैं। पानी के संसाधनों के नियोजन एवं प्रबंध के लिए पानी के इन स्रोतों को मापने और सूची बनाने में यह अंतर कम करना अनिवार्य है। इस दिशा में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय तथा अंतरिक्ष विभाग की संयुक्‍त परियोजना के तहत हाल ही में "हिमालय के बर्फ और हिमनद" पर व्‍यापक अध्‍ययन और "हिमालय के हिमनद और बर्फ : विस्‍तृत सूची और निगरानी " पर अध्‍ययन कराए गए और परिचर्चा पत्र -2 जारी किया गया।
यह हिमालय पर अब तक का सबसे अधिक चित्रों पर आधारित अध्‍ययन है। इन हिमनदों के 75 प्रतिशत को 3.75 प्रतिशत की औसत दर से खिसकते हुए दिखाया गया है तथा 8 प्रतिशत एडवांस और 17 प्रतिशत स्थिरता की स्थिति में दर्शाए गए हैं। पहली बार सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र थालों तक विस्‍तृत हिमनदों की सूची बनाई गयी है। इनकी कुल संख्‍या करीब 33,000 गिनी गयी है। इनमें से करीब 10-15 हजार हिमनद भारत के भौगोलिक क्षेत्र में होंगे।
अध्‍ययन के प्रमुख निष्‍कर्षों से पता चलता है कि पूरे हिमालयी क्षेत्र में 2004-05 से 2007-08 तक बर्फ और हिमनदों की नियमित निगरानी की गयी है। सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी थालों में हिमनदीय क्षेत्रों की व्‍यापक सूची बनाने के लिए उपग्रह आधारित मापन प्रणाली का इस्‍तेमाल किया गया। इन तीन नदी थालों में 32,392 हिमनदों की माप की गयी जिनका कुल हिमनदीय क्षेत्र 71,182 वर्ग किमी. होने का अनुमान है। अकेले भारत में ही 16,627 हिमनद हैं जो 40,563 वर्ग किमी. क्षेत्र में फैले हैं। 2,700 से अधिक हिमनदों की निगरानी की गयी। 2,767 हिमनदों में से 2,184 हिमनद खिसक रहे हैं, 435 एडवांस स्थिति में हैं और 148 में कोई परिवर्तन नज़र नहीं पाया गया।
यह अध्‍ययन अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, अहमदाबाद द्वारा किए गए चार वर्षों का परमोत्‍कर्ष है। अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र ने हिमालयी हिमनदों और क्रायोस्‍फेयर की दशा को समझने के लिए रिमोट-सेंसिंग आधारित तकनीकों और मॉडलों के विकास में भी मदद की है।

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