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शनिवार, 19 मार्च 2016

भारत का भाग्य बदलने के लिए गांव की तस्वीर बदलनी होगी- पीएम मोदी

किसान मेला भारत के भाग्‍य का मेला है, अगर भारत का भाग्‍य बदलना है, तो गांव से बदलने वाला है, किसान से बदलने वाला है और कृषि क्रांति से बदलने वाला है। हम लोग सालों से पीढ़ी दर पीढ़ी से एक ही प्रकार से किसानी करते आए हैं। बहुत कम किसान हैं जो नया प्रयोग करते हैं या कुछ नया करने का साहस करते हैं। हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि हम हमारी किसानी को आधुनिक कैसे बनाएं, टेक्‍नोलॉजी युक्‍त कैसे बनाएं, हमारी युवा पीढ़ी जो आधुनिक आविष्‍कार हो रहे हैं, उन आधुनिक आविष्कारों को खेत तक कैसे पहुंचाएं। किसान के घर तक कैसे पहुंचाएं। इस किसान मेले के माध्‍यम से एक प्रशिक्षण का प्रयास है। और मुझे खुशी है कि आज कृषि विभाग ने यह कार्यक्रम ऐसा बनाया है कि न सिर्फ यहां बैठे हुए लोग लेकिन पूरे हिंदुस्‍तान के हर गांव में किसान इस कार्यक्रम को देख रहे हैं। और सिर्फ प्रधानमंत्री का भाषण सुनना है इसलिए देख रहे हैं ऐसा नहीं है। तीन दिन तक यहां जितनी चर्चाएं होने वाली हैं वो सारी चर्चाएं गांव में बैठा हुआ किसान भी उसको देख सकता है, सुन सकता है, समझ सकता है। क्‍योंकि जब तक हम इन बातों को किसान तक पहुंचाएंगे नहीं, किसान में विश्‍वास पैदा नहीं करेंगे तो वो अगल-बगल में जो देखता है वो ही करता रहता है। और किसान का स्‍वभाव है अगर पड़ोसी ने अपने खेत में लाल डिब्‍बे वाली दवाई डाली तो यह भी जा करके लाल डिब्‍बे वाली दवाई लाकर डाल देगा। बगल वाले ने पीली दवाई डाल दी तो यह भी पीली दवाई डाल देगा। उसको ऐसा लगता है उसने किया तो मैं भी कर लूं। और जो बेचने वाले हैं उनको तो इसकी चिंता ही नहीं है कोई भी माल जाओ बेच दो, एक बार बिक्री हो जाए। बाद में कौन पूछने वाला है किसान का क्‍या हुआ। और इसलिए कृषि क्षेत्र को एक अलग नजरिये से विकसित करने की दिशा में यह सरकार प्रयास कर रही है। हमारे देश में पहली कृषि क्रांति हुई वो पहली कृषि क्रांति अधिकतम जहां पानी था उस पानी के भरोसे हुई। लेकिन दूसरी कृषि क्रांति सिर्फ पानी के भरोसे करने से बात पूरी तरह संतोष नहीं देगी। और इसलिए दूसरी कृषि क्रांति विज्ञान के आधार पर, टेक्‍नोलॉजी के आधार पर, आधुनिक आविष्‍कारों के आधार पर करना आवश्‍यक हो गया है। पहली कृषि क्रांति हिंदुस्‍तान के पश्चिमी छोर पर, पश्चिमी उत्‍तर भाग में हुई। पंजाब, हरियाणा इसने नेतृत्‍व किया दूसरी कृषि क्रांति उन प्रदेशों में संभावनाएं पड़ी है। जिस पर अगर हमने थोड़ा सा भी ध्‍यान दिया तो बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है और वो है पूर्वी उत्‍तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, नॉर्थ ईस्‍ट, ओडि़शा ये सारे हिंदुस्‍तान का पूर्वी इलाका, जहां पानी भरपूर है, जमीन की विपुलता है, जमीन ऊपजाऊ है, लेकिन वो पुराने ढर्रे से वो सब जुड़ा हुआ है और इसलिए इस सरकार का प्रयास है कि भारत के पूर्वी इलाके से एक दूसरी कृषि क्रांति कैसे हो, उस दिशा में हम कदम बढ़ा रहे हैं। भारत की आर्थिक धारा भी गांव की धुरा से जुड़ी हुई है। अगर गांव में गांव के गरीब व्‍यक्ति के द्वारा अगर आज वो पांच हजार रुपया का माल बाजार से खरीदता है साल में और अगली बार दस हजार का खरीदता है, तो अर्थव्‍यवस्‍था को वो ताकत देता है। देश आगे बढ़ता है। और यह अगर करना है तो गांव के लोगों की खरीद शक्ति बढ़ानी पड़ेगी, उनका क्रय शक्ति बढ़ाना पड़ेगा। और वो क्रय शक्ति तब तक नहीं बढता है जब तक कि गांव आर्थिक रूप से गतिशील न हो। गांव में आर्थिक गतिविधि का कारोबार न हो तो यह संभव नहीं है। और इसलिए आपने इस बार देखा होगा चारों तरफ इस सरकार के बजट की तारीफ ही तारीफ हो रही है। कुछ लोग मौन हैं क्‍योंकि उनके लिए तारीफ करना मुश्किल है, लेकिन विरोध में बोलने के लिए कुछ है नहीं। पहली बार जिन जिन लोगों ने इस विषय के ज्ञाता है, उन्‍होंने लिखा है कि एक बड़े लम्‍बे अरसे के बाद एक ऐसा बजट आया है जो पूरी तरह गांव, गरीब और किसान को समर्पित किया गया है।और यह काम इसलिए किया है अगर भारत को आर्थिक संपन्न बनना है, आने वाले 25-30 साल तक लगातार आगे बढ़ना है, रूकना ही नहीं है, तो वो जगह सिर्फ गांव है, गरीब है, किसान है। हमारा एक सपना है, लेकिन वो सपना मेरा होगा उससे बात बनेगी नहीं। वो सपना सिर्फ दिल्‍ली सरकार का होगा तो बात बनेगी नहीं। चाहे केंद्र सरकार हो, चाहे राज्‍य सरकार हो, चाहे हमारे किसान भाई-बहन हो, हम सबका मिला-जुला सपना होना चाहिए, हम सबकी जिम्‍मेदारी वाला सपना होना चाहिए। और वो सपना है 2022 छह साल बाकी है, जब भारत की आजादी के 75 साल होंगे,क्‍या हम हमारे देश के किसानों की आय दोगुना कर सकते हैं क्‍या? किसानों की आय डबल कर सकते हैं क्‍या? अगर एक बार किसान, राज्‍य सरकार, केंद्र सरकार यह मिल करके तय कर लें तो काम मुश्किल नहीं है, मेरे भाईयों-बहनों। कुछ लोगों को लगता है कि यह मुश्किल काम है। मैं इस विभाग में जाना नहीं चाहता। लेकिन यह करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए इसमें कोई दुविधा नहीं हो सकती, कोशिश जरूर करनी चाहिए। अब तक हमने देश को आगे बढाने में कृषि उत्‍पादन वृद्धि को ही केंद्र में रखा है। हम कृषि उत्‍पादन वृद्धि तक सीमित रह करके किसान का कल्‍याण नहीं कर सकते हैं। हमने किसान का कल्‍याण करना है तो हमने और पचासों चीजें उसके साथ जोड़नी होगी, और तब जा करके 2022 का सपना हम पूरा कर सकते हैं। अब हम यह सोचे कि हमारी धरती माता बेचारी बोलती नहीं है, पीड़ा है तो रोती नहीं है, आप उस पर जितने जुल्‍म करो वो सहती रहती है। अगर हम धरती मां की आवाज़ नहीं सुनेंगे, तो धरती मां भी हमारी आवाज़ नहीं सुनेगी। अगर हम धरती माता की पीड़ा महसूस नहीं करेंगे तो धरती मां भी हमारी पीड़ा कभी महसूस नहीं करेगी। और इसलिए हम सबका सबसे पहला दायित्‍व है कि हम हमारी धरती माता की पीड़ा को समझे। हमने कितने जुल्‍म किये हैं उस पर, न जाने कैसे कैसे कैमिकलों से उसको नहला दिया। न जाने कैसी-कैसी दवाईंया पिलाई उसको, न जाने कितने-कितने जुल्‍म किये हैं उस पर अगर हम भी बीमार हो जाते हैं न तो अड़ोस-पड़ोस के लोग कहते हैं कि बेटा बहुत दवाइयां मत खाओं और ज्‍यादा बीमार हो जाओगे। डॉक्‍टर भी कहते है कि भई ठीक है बीमार हो दवा की जरूरत है लेकिन ऐसा नहीं कि एक गोली की बजाए 10 गोली खा जाओगे,ठीक हो जाओगे। जो हमारे शरीर का हाल है, वो ही हाल यह हमारी धरती माता का भी है। और इसलिए हम कभी कम से कम देखे तो सही कि हमारी धरती माता की तबीयत कैसे है, कोई बीमारी तो नहीं है? क्‍या कारण है कि हम फसल बोते हैं लेकिन जितनी मेहनत करते हैं उतना मिलता नहीं है, मां रूठी क्‍यों है। · और इसलिए आपकी मदद से एक बड़ा अभियान पूरा करना है वो मृदा स्‍वाथ्‍य कार्ड हमारी जमीन की तबीयत कैसी है, उसकी परत कैसी है, उसके अंदर ताकत कौन सी है, उसके अंदर कमियां कौन सी है, उसके अंदर बीमारियां कौन सही है। यह हमने जांच करवानी चाहिए और यह regular करवानी चाहिए। यह कोई महंगा काम नहीं है, सरकार आपकी मदद कर रही है। और जांच करवा ली, लेकिन हम उस रिपोर्ट को एक खाते में डालकर कागज पड़ा है, पड़ा रहे, फायदा नहीं होगा। अगर कोई इंसान बीमार रहता है, laboratory में जाकर टेस्‍ट करवाया और पता चला कि diabetes है वो आ करके कागज घर में रख दे और खाता है जैसे ही मिठाई मिले खाता रहे, जितना मिले उतना खाता रहे तो क्‍या diabetes उसको जाएगा क्‍या? बीमारी बढ़ेगी कि नहीं बढ़ेगी। मौत निश्चित हो जाएगी कि नहीं हो जाएगी। और इसलिए soil health card के द्वारा हमें जमीन की जो कमियां नजर आई है। जमीन की जो ताकत ध्‍यान में आई है। जमीन की जो बीमारियां ध्‍यान में आई है, उसके अनुसार हमें खेती करनी चाहिए तो आपकी आधी समस्‍याएं तो वहीं सुलझ जाएगी। मैं दावे से कहता हूं मेरे किसान भाईयों-बहनों आपकी आधी समस्यायें, अगर जमीन की ठीक देखभाल कर दी, तो आपकी आधी समस्‍या वहीं सुलझ जाएगी। और एक बार धरती माता का ख्‍याल रखोगे न तो धरती माता तो आपका चार गुना ज्‍यादा ख्‍याल रखेगी। कभी आपको पीछे मुड़ करके देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दूसरी बात है पानी, किसान का स्‍वभाव है अगर उसको पानी मिल जाए तो वो मिट्टी में से सोना पैदा कर सकता है। उसे और कुछ नहीं चाहिए। और इसलिए हमने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना पर बल दिया है। किसानों को पानी कैसे पहुंचे? और कम से कम पानी बर्बाद हो, उस रूप में कैसे पड़े,इस पर काम चल रहा है। आपको हैरानी होगी मैं जरा हिसाब लगा रहा था कि हमारे किसान को पानी पहुंचाने की इतनी योजनाएं बनी हाल क्‍या है। मेरे किसान भाईयों-बहनों आपको हैरानी होगी कि हम कुछ भी करते हैं तो हमारे विरोधी यह कहते हैं कि यह तो हमारे समय का है। यह तो हमारे जमाने का है। उनके जमाने का हाल क्‍या है मैं बताता हूं किसानों का मैंने करीब 90 प्रोजेक्‍ट ऐसे खोज कर निकालें कि जहां पानी तो भरा पड़ा लेकिन किसान को पानी पहुंचाने के लिए कोई व्‍यवस्‍था ही नहीं है। अब मुझे बताइये भइया अगर कहीं डैम भरा पड़ा है। हजारों, लाखों, करोड़ों रुपया खर्च कर दिया गया है, लेकिन अगर किसान के खेत तक पानी ले जाने का प्रबंध नहीं है वो सिर्फ दर्शन करने के सिवा किसी काम आएगा क्‍या? हमने 90 ऐसे प्रोजेक्‍ट हाथ में लिए है। और उस पर बड़ा जोर लगाया है कि वो पानी किसान तक पहुंचे। जितनी उसकी capacity है पानी कैसे पहुंचे, काम लगाया है। जब यह काम पूरा कर लेंगे करीब 80 लाख हेक्‍टेयर भूमि को पानी पहुंचना शुरू हो जाएगा भाईयों-बहनो। और पानी पहुंचेगा तो वो जमीन कितना कुछ देगी आप अंदाज कर सकते हैं। 20 हजार करोड़ रुपया, इस काम के लिए लगाने की दिशा में काम कर रहा हूं मैं। इतना ही नहीं मनरेगा, बड़ी चर्चा होती है, लेकिन कहीं asset create नहीं होता है। इस सरकार ने बल दिया है। और मैं चाहूंगा इन गर्मी के दिनों में गांव-गांव मनरेगा से एक ही काम होना चाहिए, एक ही काम और सिर्फ तालाब है तो तालाब गहरे करना, मिट्टी निकालना, जहां पर पानी रोक सकते हैं रोकना। इस बजट में पांच लाख तालाब बनाने का सपना है, पांच लाख तालाब। जहां हमारे छोटे-छोटे पर्वतीय इलाके होते हैं, पहाड़ी इलाके होते हैं, जहां तीन या चार पहाड़ इकट्ठे होते हैं, वहां अगर थोड़ी सी खुदाई कर दें तो बहुत बड़े तालाब बनने की संभावना हो जाती है। मैंनेforest department को भी कहा है जंगलों को बचाना है तो वहां छोटे-छोटे तालाब का काम किया जाए,ताकि पानी होगा तो हमारे जंगल भी बचेंगे। जंगल होंगे तो वर्षा बढ़ेगी, वर्षा बढेगी तो हमारी ज़मीन में पानी ऊपर आएगा। जो 12 महीने मेरे किसान को फायदा करेगा। हम गांव-गांव इस गर्मी के दिनों में पानी बचाने के साधन कैसे तैयार करें और जितना ज्‍यादा पानी बचाने का प्रयास करेंगे, पहली बारिश में यह सब भर जाएगा। और फिर कभी बारिश इधर-उधर हो गई तो भी वो पानी हमारी खेती को बचा लेगा। उसी प्रकार से जितना महात्‍मय जल संचय का है, उतना ही महात्‍मय जल सिंचन का है। पानी यह परमात्‍मा ने दिया हुआ प्रसाद है। इसको बर्बाद करने का हमें कोई अधिकार नहीं है। एक-एक बूंद पानी का उपयोग होना चाहिए। और इसलिए per drop more crop एक-एक बूंद से फसल कैसे ज्‍यादा पैदा हो, उस पर काम करना है। हम micro irrigation में जाए, हम drip irrigation में जाए छोटे-छोटे पम्‍प लगा करके पानी पहुंचाने के लिए प्रबंध करे। liquid fertilizer दें। आप देखिए मेहनत कम हो जाएगी। खर्चा कम हो जाएगा और उत्‍पादन बढ़ जाएगा। कुछ लोगों की गलतफहमी है किsugar में भी बहुत पानी चाहिए, जमाना चला गया। अब तो micro irrigation से sugar भी हो सकता है,paddy भी हो सकता है। और इसलिए जो हमारी पुरानी मान्‍यता है कि अगर पूरा लबालब पानी से खेत भरा होगा तभी फसल होगी, ऐसी जरूरत नहीं है। अब विज्ञान बदल गया, टेक्‍नोलॉजी बदल गई। आप आराम से बदलाव करके कर सकते हैं। और इसलिए मेरे किसान भाईयों-बहनों, यह हमारी रोजमर्रा के काम है, इस पर अगर हम ध्‍यान देंगे। हम हमारे खर्च को कम कर पाएंगे। और हमारी आय को बढ़ा पांएगे। और उसी से किसान का कल्‍याण होने वाला है। हमारे यहां फसल के लिए मार्केट, यह 14 अप्रैल को बाबा साहेब अम्‍बेडकर की जन्‍म जयंती पर भारत सरकार एक ई प्‍लेटफॉर्म शुरू कर रही है, ताकि किसान को अपना माल कहां बेचना, सबसे ज्‍यादा दाम कहां मिलते हैं वो अपने मोबाइल फोन पर देख सकता है कि मुझे मेरा माल किस मंडी में कैसे बेचना और उसके कारण उसको दाम ज्‍यादा मिले। आज किसान बेचारा अगर गाँव से निकला, दो बजे अगर मंडी में पहुंचा, मंडी वाले अगर चले गए वो अपना माल बेच नहीं पाता है अगर वो सब्‍जी वगैरह लाया है तो वहीं छोड़कर चला जाता है, क्‍योंकि कोई खरीददार नहीं होता है। अगर हम इस प्रकार की व्‍यवस्‍था का उपयोग करेंगे, और आज मैंने अभी एक किसान सुविधा लॉन्च किया है। किसान अपने मोबाइल फोन पर आज के आधुनिक विज्ञान डिजिटल के माध्‍यम से अपनी आवश्‍यकताओं की जानकारी वो पा सकता है। weather का रिपोर्ट ले सकता है, मार्केट का रिपोर्ट ले सकता है। बाजार में कहां पर अच्‍छा बीच मिल सकता है ले सकता है। कृषि के कौन वैज्ञानिक है किसका संपर्क करना चाहिए, यह सारी जानकारियां आपकी हथेली में देने का प्रयास किया है। अगर हम उसका प्रयोग करेंगे तो मेरे किसान को आज जो अकेलापन महसूस होता है, उसको लगता है कि मेरा कोई नहीं है। यह सरकार कंधे से कंधा मिला करके किसान के सुख-दुख का साथी है और हम आपके साथ मिल करके काम करना चाहते हैं, क्‍योंकि हमें बदलाव लाना है उस दिशा में हम काम करना चाहते हैं। उसी प्रकार से अब समय की मांग है कि हम मूल्‍य वृद्धि करे। value additionकरे, processing करे। जितना ज्‍यादा food processing होगा, उतना ही ज्‍यादा हमारे किसान की आय बढ़ने वाली है। जितना ज्‍यादा value addition करेंगे, उतनी कमाई बढ़ने वाली है। अगर आप दूध बेचते हैं, कम पैसा मिलता है, लेकिन अगर दूध का मावां बना करके बेचते हैं, तो ज्‍यादा पैसा मिलता होगा। दूध में से घी बना करके बेचते हैं ज्‍यादा पैसा मिलता है। अगर आप कच्‍चा आम बेचते हैं कम पैसा मिलता है, लेकिन अगर कच्‍चे आम का अचार बना करके बेचे तो ज्‍यादा पैसा मिलता है। आप हरी मिर्ची बेचे, कम पैसा मिलता है। लेकिन लाल हो करके पाऊडर बना करके पैकिंग करके बेचे तो ज्‍यादा पैसा मिलता है। हमारे किसान की आय बढ़ाने का यह एक उत्‍तम से उत्‍तम से मार्ग है कि हम food processing को बल दें और food processing के लिए भारत जैसे देश में दुनिया की बहुत बड़ी टेक्‍नोलॉजी की जरूरत है, ऐसा नहीं है, हमारे यहां आमतौर पर इन चीजों को करने का स्‍वभाव बना हुआ है। उसको बल देने की जरूरत है। और गांव मिल करके करेगा। तो बहुत बड़ी ऊंचाईयों पर चला जा सकता है गांव। और आज हमने देखा है कि ऐसी चीजों ने अपने जगह बना ली है। आज दुनिया के अंदर.. मुझे अभी गल्‍फ कंट्रीज के अमीरात के क्राउन प्रिंस यहां आए थे UAE के । उन्‍होंने एक बड़ी महत्‍वपूर्ण बात बताई। उन्‍होंने कहा हमारा जो गल्‍फ कंट्रीज है प्रट्रोलियम के पैसे तो बहुत है हमारे पास, लेकिन हमारे पास पेट भरने के लिए खेती के लिए कोई संभावना नहीं है हमारी जमीन रेगिस्‍तान है। हमारी जनसंख्‍या बढ़ रही है। हमें आने वाले दिनों में जैसे-जैसे जनसंख्‍या बढ़ेगी,हमारा पेट भरने के लिए भारत से ही अन्‍न मंगवाना पड़ेगा। इसका मतलब यह हुआ कि हिंदुस्‍तान का किसान जो पैदा करेगा दुनिया के बाजार में जाने की संभावनाएं बढ़ रही है। एक बहुत बड़ा ग्‍लोबल मार्केट हमारा इंतजार कर रहा है हम अगर अपनी व्‍यवस्‍थाओं को उस स्‍टेंडर्ड की बना दें तो दुनिया हमारी चीजों को स्‍वीकार करने के लिए तैयार हो जाएगी। इन दिनों holistic health care. हर किसी को लगता है आप भले तो जग भला। और इसलिए लोगorganic खाना खाना पसंद करते हैं। कैमिकल से आया हुआ उनको खाना नहीं है। आम भी बिकता है तो पूछते हैं organic है। चावल भी लाए तो पूछते हैं organic है, गेंहू लाए तो पूछते हैं organic है। वो कहता है साहब पैसा डबल होगा, वो बोले डबल ले लो भाई दवाई खाने से ज्‍यादा अच्‍छा है कि महंगा चावल खा लूं, लेकिन दवाई खाने के लिए मुझे केमिकल वाला नहीं खाना। लोग सोच रहे हैं कि दवाई में जो पैसे जाते हैं उसके बजाय अगर वो पैसे organic चीजों को खाने में जाते हैं तो स्‍वास्‍थ्‍य भी अच्‍छा रहेगा और खर्चा भी कम होने लगेगा। लेकिन यह तब संभव होगा, जब हम organic farming की तरफ प्रयास करें। हम कोशिश करें। आज मैं सिक्‍कम प्रदेश को बधाई देता हूं| पहाड़ों में 2003 से उन्‍होंने मेहनत चालू की, 2003 से और दस साल के भीतर-भीतर सिक्किम के पूरे प्रदेश को उन्‍होंने organic state बना दिया। आज वहांchemical fertilizer का नामो-निशान नहीं है। और उनका उत्‍पादन बड़ा है, दवाईयां डालनी नही पड़ती है। जमीन में सुधार आया, पहले जो जमीन जितना देती थी। वो जमीन आज दोगुना, तीनगुना देने लग गई है। और उनका बहुत बड़ा ग्‍लोबल मार्केर्टिंग हो रहा है। क्‍या हमारे देश में हम organic farming को बल दे सकते हैं? ये तरीके हैं जो हमने आधुनिक कृषि की तरफ जाना है। मैं किसानों से एक और आग्रह करना चाहता हूं। हमारी किसानी को तीन हिस्‍सों में बांटना यह अनिवार्य हो गया है। आज हम हमारी किसानी एक ही खम्‍बे पर चलाते हैं और उसका कारण जिस समय आंधी आ जाए वो खम्‍बा हिल जाए, ओले गिर जाए वो खम्‍बा गिर जाए, बहुत बड़ी बारिश आ जाए, वो खम्‍बा गया तो पूरी साल बर्बाद हो जाती है, पूरा परिवार बर्बाद हो जाता है। लेकिन अगर तीन खम्‍बों पर हमारी किसानी खड़ी होगी तो आफत आएगी तो एक-आध खम्‍बा गिरेगा। दो खम्‍बे पर तो हमारी जिंदगी टिक पाएगी भाई। और इसलिए तीन खम्‍बे कौन से हैं जिस पर हमें किसानी करनी चाहिए एक तिहाई हम जो regularखेती करते हो वो, जो भी करते हो, मक्‍का हो, धान हो, फल हो, फूल हो, सब्‍जी हो जो करते है वो करें। एक तिहाई ताकत जहां आपके खेत की सीमा पूरी होती है। जहां boundary पर आप बाढ़ लगाते हैं बड़ी-बड़ी, एक-एक, दो-दो मीटर जमीन बर्बाद करते हैं। इधर वाला भी जमीन बर्बाद करता हैं,उधर वाला भी जमीन बर्बाद करता है, दोनों पड़ोसी बीच में जमीन बर्बाद करते हैं। क्‍या हम वहाँ पर टिम्‍बर की खेती कर सकते हैं क्‍या? ऐसे पेड़ उगाए जिससे फर्नीचर बनता है, मकान बनाने में काम आता है। ऐसे वृक्षों की खेती करे। ऐसे पेड़ लगाए। 15-20 साल में घर में बेटी शादी हो करने योग्‍य जाएगी, यह एक पेड़ काट दोगे, बेटी की शादी हो जाएगी। आज हिंदुस्‍तान बहुत बड़ी मात्रा में टिम्‍बरimport करता है। विदेशों में पैसा जाता है हमारा। अगर हमारा किसान तय कर ले कि खेत के किनारे पर जो जमीन आज बर्बाद हो करके पड़ी है, सिर्फ demarcation के लिए पड़ोसी ले न जाए इसलिए बाढ़ लगा करके बैठे हैं दो-दो, तीन-तीन मीटर खराब हो रही है, जमीन। आप देखिए कितनी बड़ीincome हो सकती है। और तीसरा, तीसरा महत्‍वपूर्ण पहलू है animal husbandry. दूध के लिए कुछ करे, अण्‍डों के लिए पॉल्‍ट्री फार्म करे। मधुमक्‍खी का पालन करे, मधु का निर्माण करे, शहद का निर्माण करे। इसके लिए अलग ताकत नहीं लगती है। सहज रूप से साथ-साथ चलता है। और यह भी बहुत बड़ा ताकत देने वाला काम है। और मैं चाहूंगा कि भारत जो कि दुनिया में सबसे ज्‍यादा दूध उत्‍पादन करता है, लेकिन यह दुर्भाग्‍य है कि प्रति पशु जितना दूध उत्‍पादन होना चाहिए वो अभी हमें पार करना बाकी है। और इसलिए हमारे पशु की दूध की productivity कैसे बढ़े, उस पर हमने बल देना है। पशु को आहार मिले, उस आहार के लिए अलग से प्रबंध करना है। पशु को आरोग्‍य की सुविधाएं मिलें उस पर ध्‍यान केंद्रित करना है। हमारे पशु की नस्‍ल बदलें इसके लिए सरकार बड़ा मिशन ले करके काम कर रही है। ऐसे अनेक प्रयास है जिन-जिन प्रयासों के परिणामस्‍वरूप हम हमारे पशुधन की ताकत को बढ़ा सकते हैं। उससे हम अपनी आय बढ़ा सकते हैं। आज शहद दुनिया में शहद का बहुत बड़ा मार्केट है। भारत का किसान शहद के उत्‍पादन में बहुत कम संख्‍या में है। और शहद ऐसा है कभी खराब नहीं होता। सालों तक घर में रहे, घर में भी काम आता है बेचने के भी काम आता है। दवाईयों में भी बिकता है और एक खेत के कोने में हमारे घर के ही कोई व्‍यक्ति उसको संभाले तो काम चल जाता है। इन तीनों खम्‍बों पर अगर हम हमारी किसानी को आगे बढ़ांएगे, तो किसान को प्राकृतिक आपदा के कारण संकट आने के बावजूद भी बचने का रास्‍ता निकल आ सकता है, बर्बाद होने से बच सकता है। और इसके लिए सरकार की योजनाएं हैं। इस बार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना मेरे किसान भाईयों-बहनों के चरणों में मैंने रखी है। यह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यह सिर्फ कागज़ी योजना नहीं है,यह किसान की जिंदगी से जुड़ा हुआ काम है। और मैंने बड़ी भक्ति के साथ मेरे किसानों की भक्ति करने के लिए यह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ले करके मैं आपके पास आया हूं। बड़ा विचार-विमर्श किया है मैंने किसानों से सलाह-मश्‍विरा किया है, अर्थशास्त्रियों से किया है, सरकारों से किया है, बीमा कंपनियों से किया है और तब जा करके योजना बनी है। हमारे देश में अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने फसल बीमा योजना चालू की। बाद में दूसरी सरकार आई उसने उसमें थोड़ा इधर-उधर कर दिया। मुसीबत यह आई कि किसान का फसल बीमा में से विश्‍वास ही उठ गया। उसको लगता है कि पैसे ले तो जाते हैं लेकिन मुसीबत के समय आते ही नहीं है। किसान की शिकायत सच्‍ची है। मैंने उन सारी शिकायतों को ध्‍यान में रख करके योजना बनाई है। और यह पहली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ऐसी है कि जिसमें प्रीमियम कम से कम है। और सुरक्षा ज्‍यादा से ज्‍यादा है। यह पहली बार ऐसा हुआ है। अब तक हमारे देश में सौ किसान हो, तो 20 किसान से ज्‍यादा फसल बीमा कोई लेता ही नहीं है। और धीरे-धीरे वो भी कम हो रहे थे। कम से कम इतना तो तय करे कि एक-दो साल में गांव के आधे किसान फसल बीमा योजना ले लें। इतना हम कर सकते हैं क्‍या? अब टेक्‍नोलॉजी का उपयोग होने वाला कि प्राकृतिक आपदा आई तो क्‍या नुकसान हुआ, कहां नुकसान हुआ? तुरंत हिसाब लगाया जाएगा। और तुरंत पैसे मुहैया कराने की व्‍यवस्‍था यह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में है। अब दो-दो, तीन-तीन साल इंतजार करने की जरूरत नहीं। और एक महत्‍वपूर्ण काम है, पहले ओले गिर गए, आंधी आ गई, नुकसान हो गया, उसका भी हिसाब रहता था। लेकिन फसल काटने के बाद खेत में अगर उसका ढेर पड़ा है, और अचानक आंधी आई,बारिश आई, ओले गिरे, बर्बाद हो गया तो सरकार कहती थी कि भई नहीं यह फसल बीमा में नहीं आता, क्‍यों? क्‍योंकि यह तो तुम्‍हारी कटाई हो गई है, तुम घर नहीं ले गए इसलिए खराब हुआ तुमको ले जाना था। इस सरकार ने एक ऐसी फसल बीमा योजना लाई है कि कटाई के बाद अगर 14 दिन तक खेत के अंदर अगर पड़ा है सामान और अगर बारिश आ गई तो उसका भी बीमा मिलेगा, यहां तक निर्णय किया गया है। और एक निर्णय किया है कि मान लीजिए आपने सोचा कि जून महीने में बारिश आने वाली है,सारा खेत तैयार करके रखा, बीज ला करके रखे, मेहनत करने के लिए जो भी करना पड़े सब करके रखा, लेकिन जून महीने में बारिश आई नहीं, जुलाई महीने में बारिश आई नहीं, अगस्‍त महीने में बारिश आई नहीं। अब आपका क्‍या होगा भई, जब बारिश ही नहीं आई, तो फसल खराब होने का सवाल ही नहीं होता है, क्‍यों, क्‍योंकि आपने बोया ही नहीं है। अब जब बोया ही नहीं है तो फसल हुई ही नहीं। फसल हुई नहीं तो फसल बर्बाद हुई नहीं और फिर बीमा वाले कह देते हैं अब तुम्‍हारी छुट्टी,कुछ नहीं मिलेगा। इस सरकार ने एक ऐसी योजना बनाई है कि अगर आपके इलाके में बारिश नहीं आई, आपका बोना संभव ही नहीं हुआ तो भी आपको 25 प्रतिशत पैसे मिल जाएंगे, ताकि आपका साल बर्बाद न हो जाए, यह काम हमने सोचा है। भाईयों-बहनों किसान के लिए क्‍या किया जा सकता है इसकी एक-एक बारीक चीज पर हमने ध्‍यान दिया है। अगर हमारे यहां पहले कोई प्राकृतिक आपदा आ जाए, तो 50 प्रतिशत अगर नुकसान होता था तब पैसे मिलते थे और वो भी एक पूरे इलाके में 50 प्रतिशत हिसाब बैठना चाहिए। हमने यह सब निकाल दिया और हमने कहा अगर 33 percent भी हुआ तो भी उसको मुआवजा दिया जाएगा। आजादी से अब तक सभी सरकारों में इस विषय की चर्चा हुई। हर किसानों ने इसकी मांग की,लेकिन किसी सरकार ने इसको किया नहीं था। हमने इसको कर दिया। भाईयों-बहनों प्राकृतिक आपदा में किसान को मदद कैसे मिले? इसके सारे norms बदल दिये। सारी परंपराएं निकाल दी है। और किसान को विश्‍वास दिलाया है और दूसरा यह भी किया है कि जनधन अकाउंट खोलो, मदद सीधी आपके खाते में जाएगी। कोई बिचौलिए के पैर आपको पकड़ने नहीं पड़ेंगे। हम सब जानते हैं यूरिया के लिए क्‍या-क्‍या होता था। रात-रात कतार में किसान खड़ा रहता था। कल यूरिया आने वाला है। और यूरिया की काला-बाजारी होती थी। कहीं-कहीं पर यूरिया लेने के लिए लोग किसान आते थे, लाठी चार्ज होता था। और मेरा तो अनुभव है मैं प्रधानमंत्री बन करके बैठा तो पहले तीन, चार, पांच महीने सारे मुख्‍यमंत्रियों की एक ही चिट्ठी आती थी कि हमारे प्रदेश में यूरिया कम है यूरिया भेजो, यूरिया भेजो, यूरिया भेजो। भारत सरकार यूरिया क्‍यों देती नहीं है। जो हमारे विरोधी लोग थे वो बयान देते थे अखबारों में भी छपता था कि मोदी सरकार यूरिया नहीं देती। पिछले दिनों यूरिया पर इतना काम किया, इतना काम किया कि गत वर्ष मुझे एक भी मुख्‍यमंत्री ने यूरिया की कमी है ऐसी चिट्टी नहीं लिखी। पूरे देश में कहीं पर भी यूरिया को ले करके लाठी चार्ज नहीं हुआ है। कहीं पर किसान को मुसीबत झेलनी पड़ी। और अब तो और कुछ किया है हमने यूरिया को नीम कोटिंग किया है। यह नीम कोटिंग क्‍या है? यह जो नीम के पेड़ होते हैं, उसकी जो फली होती है उसका तेल यूरिया पर लगाया गया है, उसके कारण जमीन को ताकत मिलेगी। अगर आज आप दस किलो यूरिया उपयोग करते हैं, नीम कोटिंग है, तो छह किलो, सात किलो में चल जाएगा, तीन किलो, चार किलो का पैसा बच जाएगा। यह किसान कीincome में काम आएगा। किसान की income डबल कैसे होगी, ऐसे होगी। नीम कोटिंग का यूरिया। और इससे एक और फायदा है जहां-जहां नीम के पेड़ हैं वहां अगर लोग फली इकट्ठी करेंगे तो उस फली का बहुत बड़ा बाजार खड़ा हो जाएगा, क्‍योंकि यूरिया बनाने वालों को नीम कोटिंग के लिए चाहिए, क्‍योंकि भारत सरकार ने hundred percent यूरिया नीम कोटिंग का कर दिया है। इसका दूसरा परिणाम यह होगा पहले क्‍या होता था यूरिया सारा लिखा जाता था तो किसान के नाम पर। सरकार के दफ्तर में लिखा जाता था कि किसान को यूरिया की सब्सिडी में इतने हजार करोड़ गए। लेकिन क्‍या सचमुच में वो किसान के लिए जाते थे क्‍या? सब्सिडी जाती थी, यूरिया के लिए जाती थी,लेकिन यूरिया किसान तक नहीं पहुंचता था वो केमिकल के कारखाने में पहुंच जाता था। क्‍योंकि उसको सस्‍ता माल मिलता था, वो उस पर काम करता था और उसमें से वो चीजें बना करके बाजार में बेचता था और हजारों-लाखों रुपये की कमाई हो जाती थी। अब नीम कोटिंग के कारण एक ग्राम यूरिया भी किसी केमिकल फैक्‍ट्री को काम नहीं आएगा। चोरी गई, बेईमानी गई और किसान को जो चाहिए था वो किसान को पहुंच गया। मेरे कहना का तात्‍पर्य यह है मेरे किसान भाईयों-बहनों कि अब हमें आधुनिक विज्ञान का उपयोग करते हुए कृषि के क्षेत्र में आगे बढ़ना है। हमने प्रयोग करने की हिम्‍मत दिखानी है। आज सब कुछ विज्ञान मौजूद है। आज जो सरकार ने initiative लिए हैं, वो आपके दरवाजें पर दस्‍तक दे रहे हैं। मैं खास करके युवा किसानों को निमंत्रण देता हूं आप आइये, मेरी बात पर गौर कीजिए, भारत सरकार की नई योजनाओं को ले करके आगे बढि़ए। और मैं विश्‍वास दिलाता हूं भारत का ग्रामीण जीवन,भारत के ग्रामीण गरीब का जीवन, भारत के किसान का जीवन हम बदल सकते हैं और उस काम के लिए मुझे आपका साथ और सहयोग चाहिए। मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं। राधामोहन जी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं है। यह कृषि मेला के द्वारा आने वाले दिनों में सभी किसान उसका फायदा उठाए। यही शुभकामनाओं के साथ बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

EVM मशीन में टोटेलाइजर के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के साथ बैठक की

निर्वाचन आयोग ने चुनाव सुधार और चुनाव के आयोजन से संबंधित कुछ महत्‍वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए आज नई दिल्‍ली में सभी मान्‍यता प्राप्‍त राष्‍ट्रीय और राज्‍य राजनैतिक दलों के साथ बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में सभी 6 राष्‍ट्रीय दलों और 29 राज्‍य दलों ने भाग लिया। बैठक में जिन मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ उनमें ईवीएम पर वोटों की गिनती के लिए टोटेलाइजर का उपयोग शामिल है। टोटेलाइजर के उपयोग का लाभ यह है कि किन्‍हीं विशेष मतदान केंद्रों में मतदान के रूख का खुलासा नहीं होगा, क्‍योंकि टोटेलाइजर के माध्‍यम से प्रदर्शित किए गए परिणाम मतदान केंद्रों के समूह में दिए गए मतों का ही परिणाम होंगे। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के सामने टोटेलाइजर के कामकाज का प्रदर्शन भी किया गया। जिन महत्‍वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया उनमें से कुछ इस प्रकार हैं- (i) किसी बहुचरण वाले चुनाव में जब एक चरण का मतदान होने में 48 घंटे शेष हों और जब खुले अभियान और इलैक्‍ट्रोनिक मीडिया पर चुनाव सामग्री का प्रदर्शन करने पर आरपी अधिनियम 1951 की धारा 126 के तहत प्रतिबंध हो तो मतदान अभियान गतिविधियों के प्रसारण पर किसी प्रतिबंध पर विचार करने की जरूरत/वांछनीयता। (ii) उम्‍मीदवार की आय के श्रोत की घोषणा के कालम को शामिल करने के लिए शपथ पत्र के प्रारूप में संशोधन (iii) मतदान वाले दिन चुनाव मशीनरी द्वारा वितरित की जा रही मतदाता पर्चियों के वितरण को ध्‍यान में रखते हुए मतदान केंद्रों के पास उम्‍मीदवार/ दलों की उपस्थिति की वर्तमान पद्धति को जारी रखने की जरूरत। (iv) चुनाव अभियान संबंधित भाषणों और प्रवचनों में कुछ मानकों को बनाए रखने की जरूरत। (v) उम्‍मीदवारों की सुरक्षा जमा राशि में बढ़ोतरी करना। इस बैठक में मौजूद राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राजनैतिक दलों के ओर से लाभदायक मत जाहिर किए जिन पर उचित कार्यवाही के लिए आयोग द्वारा विधिवत विचार किया जाएगा।

शुक्रवार, 18 मार्च 2016

सामुदायिक रेडियो नेटवर्क के नए पोर्टल की शुरुआत

केंद्रीय पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, जन शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने आज यहां ‘सामुदायिक रेडियो स्टेशन संघ’ द्वारा आयोजित एक दिवसीय सेमिनार के उद्घाटन सत्र के दौरान सामुदायिक रेडियो नेटवर्क के नए पोर्टल की औपचारिक शुरुआत की। अपने संबोधन में डा. जितेंद्र सिंह ने कहा, देश भर में टीवी चैनलों की जोरदार उपस्थिति और तेजी से बढ़ रही संख्या के बावजूद, रेडियो की अब भी दूरदराज तथा उन परिधीय क्षेत्रों में पहुंच है, जहां टेलीविजन उपलब्ध नहीं है। फिर चाहे वहां बिजली की अनुपलब्धता हो या फिर सिग्नल का संकट। आज देश में 15,000 के करीब पंचायतें ऑप्टिकल फाइबर सुविधा से जुड़ गई हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा करते हुए डा. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ‘मन की बात’ के हर महीने हो रहे प्रसारण ने न केवल रेडियो के श्रोताओं की संख्या में वृद्धि करने में योगदान दिया है बल्कि टीवी चैनलों को भी ‘मन की बात’ का सीधा प्रसारण करने के बाध्य किया है। इस अवसर पर संसद सदस्य श्रीमती संतोष अहलावत, जन संचार से प्रो. ब्रिज किशोर कुठियाला और मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री श्री कमल पटेल ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस कार्यक्रम का संचालन श्री रमेश हंगलू ने किया। जम्मू-कश्मीर राज्य में जम्मू में पहला सामुदायिक रेडियो स्टेशन स्थापित करने का श्रेय हंगलू को ही जाता है। श्री हंगलू ने जरूरतमंदों में शिक्षा का फैलाव करने के लिए अधिक सामुदायिक भागीदारी और सामुदायिक रेडियो नेटवर्क के जरिए केंद्र सरकार की गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं के प्रति जागरुकता लाने की जरूरत बताई।

पोखरण में वायुसेना ने मारक क्षमता का प्रदर्शन किया

भारतीय वायु सेना माननीय राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में राजस्थान के पोखरण फायरिंग रेंज में 18 मार्च को लड़ाकू और मारक क्षमता का प्रदर्शन किया। इस दौरान भारतीय वायुसेना दिन और रात दोनों ही समय में अपनी मारक क्षमता को प्रदर्शित करेगी। चीफ्स ऑफ स्टॉफ कमेटी के अध्यक्ष और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अरूप राहा ने पोखरण में माननीय राष्ट्रपति और माननीय प्रधानमंत्री की अगवानी की। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य देश के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के लिए भारतीय वायुसेना की क्षमता का प्रदर्शन करना है। अभ्यास के दौरान भारतीय वायुसेना हवा, जमीन अथवा समुद्र से मिलने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी परिवर्तनकारी अत्याधुनिक लड़ाकू क्षमता को दिखाएगी। इस प्रदर्शन में छह थीम पर आधारित छह हिस्से होंगे, जिसमें 180 से अधिक लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और हेलीकाप्टर हिस्सा ले रहे हैं। शो में सबसे पहले एक फ्लाईपास्ट होगा, जो भारतीय वायुसेना की आठ दशकों की यात्रा को दिखाएगा। इसमें टाइगर मोठ जैसे अतीत के विमान भारतीय वायुसेना के नवीनतम विमानों के साथ उड़ान भरेंगे। फ्लाईपास्ट के दौरान मिग-21, मिग-27 और मिग-29 और सुखोई-30 मिश्रित फार्मेशन में उड़ान भरेंगे। यह पिछले दशकों के दौरान भारतीय सेना के परिवर्तन को दर्शाएगा। इसके बाद, नेट-इनेबलिंग संचालन विमानों का प्रदर्शन होगा। इसकी शुरुआत देश में ही विकसित एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम एयरक्राफ्ट के फ्लाईपास्ट से होगी। इसके बाद सिंक्रनाइज हथियार आपूर्ति को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें मिराज-2000, सुखोई-30, मिग-27 और जगुआर जैसे विमान निर्धारित लक्ष्यों पर बमबारी करेंगे। आक्रामक क्षमताओं का प्रदर्शन करने के बाद भारतीय वायुसेना अपने बहुस्तरीय हवाई सुरक्षा ऑपरेशंस का प्रदर्शन करेगी। यह हवा में ईंधन भराने वाले विमानों, आईएल-78 एफआरए के साथ दो सुखोई-30 विमानों का फ्लाईपास्ट होगा। ये लड़ाकू विमानों की सामरिक पहुंच का विस्तार करने की क्षमता का प्रदर्शन करेंगे।

गुरुवार, 17 मार्च 2016

सुकन्‍या समृद्धि खाता: बालिकाओं के सु‍रक्षित भविष्‍य की दिशा में ठोस कदम

लड़कों को प्राथमिकता देने वाली रुढि़वादी और गलत मानसिकता के कारण कुछ लोग कन्‍या भ्रूण हत्‍या कर देते हैं। इसके कारण देश में लैंगिक अनुपात में असमानता पैदा होती है। 2011 की जनगणना के अनुसार बाल लिंग अनुपात 914 दर्ज किया गया, जो स्‍वतंत्रता के बाद न्‍यूनतम है। संयुक्‍त राष्‍ट्र ने इसी वर्ष जो रिपोर्ट प्रकाशित की थी, उसमें इस स्थिति को ‘आपातकालीन’ के रूप में उल्‍लेखित किया गया है। रिपोर्ट में इसका कारण देश में अवैध रूप से किए जाने वाले गर्भपात को बताया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि देश के समाजिक ढांचे में पुरुषों के बर्चस्‍व को रोकने के लिए तुरंत उपाय किए जाने चाहिए। इसके लिए स्‍कूली और उच्‍च शिक्षा को महत्‍पूर्ण घटक के रूप में पेश किया गया था ताकि लोग लिंग अनुपात के प्रति जागरुक हो सकें। जनवरी 2015 में केंद्र सरकार ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना शुरू की, जिसका उद्देश्‍य लड़कियों के प्रति लोगों की मानसिकता में सकारात्‍मक परिवर्तन लाना है ताकि लड़कियों के साथ भेद-भाव समाप्‍त हो सके। इस योजना के जरिये सरकार देश के लोगों को जागरुक कर रही है ताकि लड़कियों और महिलाओं की स्थिति सुधर सके और लैंगिक समानता का लक्ष्‍य पूरा हो सके। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के साथ ही ‘सुकन्‍या समृद्धि खाता’ योजना भी शुरू की है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के बारे में तो बहुत कुछ लिखा-पढ़ा गया है, लेकिन सुकन्‍या समृद्धि खाते के बारे में लोगों को कम जानकारी है। उल्‍लेखनीय है कि सुकन्‍या समृद्धि खाता छोटी बचत योजना है, लेकिन उसमें देश की लड़कियों के जीवन को प्रभावित करके उनमें आत्‍म सम्‍मान की भावना पैदा करने की क्षमता है। इस योजना का उद्देश्‍य लड़कियों को शिक्षित करने और उनका विवाह खर्च मुहैया कराकर उनके सुनहरे भविष्‍य का निर्माण करना है। योजना के तहत माता-पिता या कानूनी अभिभावक लड़की के नाम से खाता खोल सकते हैं और उसका संचालन लड़की के 10 वर्ष की आयु होने तक कर सकते हैं। योजना के संबंध में सरकारी अधिसूचना के अनुसार यह खाता किसी भी डाकखाने और निर्धारित सरकारी बैंकों में खोला जा सकता है। जो बैंक योजना के तहत खाता खोलने के लिए अधिकृत हैं उनमें भारतीय स्‍टेट बैंक, स्‍टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्‍टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्‍टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्‍टेट बैंक ऑफ बीकानेर और जयपुर, स्‍टेट बैक ऑफ पटियाला, विजया बैक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, सिंडिकेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, इंडियन ओवसीज बैंक, इंडियन बैंक, आईडीबीआई बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, देना बैंक, कारपोरेशन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, बैंक ऑफ महाराष्‍ट्र, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, एक्‍सिस बैंक, आंध्रा बैंक और इलाहाबाद बैंक शामिल हैं। योजना के तहत जमा की जाने वाली रकम पर वार्षिक 9.2 प्रतिशत ब्‍याज दिया जाएगा। यह बहुत आकर्षक ब्‍याज दर है। बहरहाल, सरकार हर वर्ष ब्‍याज दर की समीक्षा करेगी और आम बजट के समय उसकी घोषणा की जाएगी। हर वर्ष जमा की जाने वाली रकम की न्‍यूनतम सीमा 1000 रुपये और अधिकतम सीमा एक लाख 50 हजार रुपये है। एक महीने में या एक वित्‍त वर्ष के दौरान रकम जमा करने की बारम्‍बारता की कोई सीमा नहीं है। खाते की वैधानिकता उसके खोले जाने की तारीख से लेकर 21 वर्ष की है, जिसके बाद रकम परिपक्‍व होकर उस लड़की को दे दी जाएगी जिसके नाम पर खाता है। यदि परिपक्‍वता के बाद खाता बंद नहीं किया जाता है तो बैलेंस रकम पर ब्‍याज मिलता रहेगा, जिसके बारे में समय-समय पर सूचना प्रदान की जाती रहेगी। यदि लड़की का विवाह 21 वर्ष पूरा होने के पहले हो जाता है तो खाता अपने-आप बंद हो जाएगा। खाता खोलने की तारीख से 14 वर्ष तक रकम जमा की जाएगी। इसके बाद जमाशुदा रकम पर ब्‍याज मिलता रहेगा। यदि न्‍यूनतम आवश्‍यक निर्धारित राशि एक हजार रुपये को माता-पिता या अभिभावक जमा नहीं करते हैं तो खाता सक्रिय नहीं माना जाएगा। इस स्थिति में खाते को प्रति वर्ष 50 रुपये पेनाल्‍टी के सथ दोबारा चालू किया जा सकता है, लेकिन न्‍यूनतम रकम भी जमा करनी होगी। 21 वर्ष की परिपक्‍वता अवधि पूरी होने के पहले खाताधारी लड़की रकम निकाल सकती है बशर्ते कि उसकी आयु 18 वर्ष की हो गई हो। इस स्थिति में वह कुल जमा राशि का 50 प्रतिशत ही निकाल पाएगी। इसके लिए यह जरूरी है कि निकाली जाने वाली रकम या तो उच्‍च शिक्षा प्राप्‍त करने के लिए हो या विवाह के लिए हो। यह भी उल्‍लेखनीय है की रकम निकालने के समय खाते में कम से कम 14 वर्ष या उससे अधिक की जमा मौजूद हो। माता-पिता या अभिभावक लड़की के नाम एक ही खाता खोल सकते हैं और दो लड़कियों के नाम अधिकतम दो खाते खोले जा सकते हैं। यदि पहले एक लड़की हो और उसके बाद जुड़वा लड़कियां पैदा हों या पहली बार में ही तीन लड़कियां पैदा हों तो ऐसी स्थिति में तीन लड़कियों के नाम से बैंक खाते खोले जा सकते हैं। सुकन्‍या समृद्धि खाता कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें कर छूट प्रदान की जाती है। जमा की जाने वाली रकम और परिपक्‍व रकम को आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत पूरे कर छूट प्राप्‍त है। परिपक्‍व होने के पहले खाता बंद करने की दूसरी शर्त यह है कि जब सक्षम अधिकारी यह सुनिश्चित हो जाएगा कि अब जमाकर्ता के लिए खाते में रकम जमा करना संभव नहीं है और रकम जमा करने में मुश्किल हो रही है तो खाता बंद किया जा सकता है। खाता बंद करने की और कोई तीसरी वजह नहीं मानी जाएगी। खाता खोलने की प्रक्रिया बहुत आसान है और इसके लिए तीन दस्‍तावेजों की आवश्‍यकता होगी—1. अस्‍पताल या सरकारी अधिकारी द्वारा प्रदान किया गया लड़की का जन्‍म प्रमाण पत्र 2. लड़की के माता-पिता या कानूनी अभिभावक के निवास का प्रमाण पत्र, जो पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, बिजली या टेलीफोन बिल, मतादाता पहचान पत्र, राशन कार्ड या भारत सरकार द्वारा प्रदत्‍त अन्‍य कोई भी प्रमाण पत्र जिसमें निवास का उल्‍लेख हो, 3. पैन कार्ड या हाईस्‍कूल प्रमाण पत्र भी खाता खोलने के लिए मान्‍य है। खाता खोले जाने के बाद उसे भारत में कहीं भी स्‍थानांतरित किया जा सकता है। योजना में अभिभावक उसी समय शामिल हो सकता है जब लड़की के माता-पिता दोनों मृत हो चुके हो या वे खाता खोलने और उसे चलाने के अयोग्‍य हों। यह उल्‍लेख जरूरी है जिस लड़की के नाम से खाता खोला जाएगा वह यदि चाहे तो 10 वर्ष की आयु पूरा होने के बाद खुद अपना खाता चला सकती है। सुकन्‍य समृद्धि खाता एक छोटी निवेश योजना भले हो लेकिन यह इस समय बहुत आवश्‍यक है और इससे लड़कियों को वित्‍तीय सुरक्षा मिलने में सहायता होगी।

बुधवार, 16 मार्च 2016

कैलाश मानसरोवर यात्रा- 2016

विदेश मंत्रालय ने कैलाश मानसरोवर यात्रा-2016 के लिए http://kmy.gov.in वेबसाइट पर ऑन लाइन आवेदन शुरू करने की घोषणा की है। यह यात्रा 12 जून से 9 सितंबर 2016 के दौरान लिपुलेख तथा नाथूला के रास्‍ते की जाएगी। लिपुलेख दर्रा (उत्‍तराखंड) के रास्‍ते 200 किलो मीटर की कठिन यात्रा करनी पड़ती है। इस पर प्रति व्‍यक्ति 1.6 लाख रुपये खर्च आता है। इस रास्‍ते से एक जत्‍थे में 60 यात्रियों वाले 18 जत्‍थे जाएंगे। नाथूला दर्रा (सिक्किम) का रास्‍ता वाहन मार्ग है और इस पर प्रति व्‍यक्ति 2 लाख रुपये प्रति व्‍यक्ति खर्च आने का अनुमान है। इस रास्‍ते से प्रत्‍येक जत्‍थे में 50 यात्रियों के 7 जत्‍थे होंगे। आवेदक की आयु सीमा 1 जनवरी 2016 को 18 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आवेदक दोनों में कोई एक मार्ग चुन सकते हैं। वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए नाथूला रास्‍ते को प्राथमिकता दी जाएगी। पहली बार आवदेन करने वालों, वरिष्‍ठ नागरिकों तथा डाक्‍टरों को प्राथमिकता दी जाएगी। आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑन लाइन है। ऑन लाइन आवेदन पत्र में आवश्‍यक निर्देश और आवेदन भरने के लिए हिन्‍दी और अंग्रेजी में दिशा निर्देश दिए गए हैं। इस यात्रा के लिए यात्रियों का चयन किया जाएगा और उन्‍हें मार्ग और जत्‍था किराये के अनुसार दिया जाएगा। यह प्रक्रिया कम्‍युटर से पूरी होगी और इसमें लैंगिक संतुलन बनाए रखा जाएगा। आवेदक आईबीआरएस हेल्‍प लाइन नम्‍बर 011-24300655 पर कोई सूचना या अपने आवेदन की स्थिति जान सकते हैं।

मंगलवार, 15 मार्च 2016

समुद्री यातायात को बढ़ावा देने के लिए सरकार तत्पर

भारत सरकार ने भारतीय समुद्री क्षेत्र को मजबूत बनाने और इसे बढ़ावा देने के लिए बजट 2016-17 में निम्नलिखित कर प्रोत्साहनों का प्रस्ताव किया है - (i)जहाजों द्वारा आयात माल की ढुलाई की सेवाओं को यात्रा चार्टर की नकारात्मक सूची से निकालना- भारत से माल के आयात के लिए शिपिंग कंपनियों द्वारा लिए जाने वाले भाड़े प्रभार को नकारात्मक सूची से बाहर कर दिया गया है और ऐसी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयुक्त सामग्री पर सेनवैट क्रेडिट प्रयोग करने की अनुमति दी गई है। इससे भारतीय और विदेशी शिपिंग कंपनियों के दरमियान कराधान क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी अंतर में संतुलन कायम होगा। इस सकारात्मक परिवर्तन से भारत प्रमुख प्रगतिशील समुद्रीय अधिकार-क्षेत्र के स्तर पर आ जाएगा जिसके तहत पहले ही आयात किये जाने वाले माल के लिए प्रयुक्त सामग्री पर भुगतान किये गए करों का पूरा क्रेडिट दिया जाता है। (ii)भारतीय जहाजों द्वारा निर्यात माल की ढुलाई की सेवाओं की शून्य रेटिंग- निर्यात माल की ढुलाई के सेवाओं को निर्यात के रूप में नहीं लिया जा रहा था और माल के निर्यात के लिए सेनवैट क्रेडिट उपलब्ध नहीं था जिससे भारतीय फ्लैगशिपों के लिए सेवाएं महंगी हो रही थी। अब यह प्रस्ताव किया गया है कि भारतीय जहाजों द्वारा देश से बाहर माल की ढुलाई के द्वारा भारतीय शिपिंग कंपनियों द्वारा उपलब्ध करायी गई सेवाओं को सेवा उपलब्ध कराने में प्रयुक्त सामग्रियों के लिए सेनवेट क्रेडिट की उपलब्धता को 01 मार्च, 2016 से जीरो रेटिड किया जाएगा। इससे माल ढुलाई की लागत कम होगी और भारत प्रमुख प्रगतिशील समुद्रीय अधिकार-क्षेत्र के स्तर पर आ जाएगा जहां समुद्री सेवाओं पर कराधान नहीं है और समुद्री सेवाओं में प्रयुक्त सामग्रियों पर भुगतान किये गए करों का पूरा क्रेडिट भी प्रदान किया जाता है। (iii)तटीय शिपिंग पर सेवा कर मामले में कमी - सड़क या रेल के बजाय तटीय शिपिंग के माध्यम से माल की ढुलाई को प्रोत्साहित करने की जरूरत को महसूस करते हुए सरकार ने केंद्रीय बजट 2015-2016 में सड़क और रेल के अनुरूप सेवा कर में 70 प्रतिशत के बराबर छूट देने का प्रस्ताव किया गया था। तथापि सेवा में प्रयुक्त सामग्रियों पर सेनवैट क्रेडिट की कमी के कारण शिपिंग कंपनियांग्राहकों को कम लागत पर सेवाएं प्रदान करने में समर्थ नहीं थी। सरकार ने वर्तमान बजट में इस विसंगति में सुधार किया है। (iv)पूंजीगत वस्तुओं, कच्चे माल और समुद्र में जा रहे जहाजों की मरम्मत में प्रयोग होने वाले पुर्जों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कमी - इससे समुद्र में जा रहे जहाजों की मरम्मत में प्रयोग की गई सामग्री की लागत में 4 प्रतिशत कमी आएगी। लेकिन यह सामग्री देश में खरीदी गई हो। इस संसोधन में शिपयार्ड को समुद्र में जाने वाले वाहनों की मरम्मत के लिए बिना कोई ड्यूटी का भुगतान किए पूंजीगत वस्तुओं की खरीद ने की अनुमति दी गई है। हालांकि ऐसी सामग्री की खरीद पर अभी तक 12.5 प्रतिशत शुल्क लगता था (v)जहाज निर्माण और जहाज की मरम्मत के लिए माल की खरीदी को पर सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क में छूट प्राप्त करन की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है - जहाज निर्माण और जहाज की मरम्मत के लिए केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क की रियायती / शून्य दर खरीददारी करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया गया है। नई प्रक्रिया में रियायती / शून्य दर सामान की खरीददारी के लिए अनुमोदन प्राप्त करने के बजाय केवल सीमा शुल्क विभाग को सूचना देने की जरूरत है। इससे काम करने में आसानी हुई है। (vi)सभी अप्रत्यक्ष करों के भुगतान में देरी पर ब्याज दरों का युक्तिकरण - यह महसूस किया गया है कि कम ब्याज दरों पर समुद्री क्षेत्र के वित्तीय भार को कम किया जा सकेगा। (2.)भारतीय शिपिंग उद्योग को सहूलियत देन और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार ने पहले ही कुछ नीतियों को लागू किया गया है जो इस प्रकार हैं – i. शिपयार्ड के लिए बुनियादी ढ़ाचे का दर्जा - बुनियादी ढांचे पर संस्थागत प्रणाली ने 21 दिसंबर, 2015 को जहाज निर्माण और जहाज की मरम्मत करने वाले शिपयार्ड को बुनियादी ढांचा क्षेत्रों की संगत सूची में शामिल करने की सिफारिश की है। ii.भारतीय शिपयार्डों के लिए वित्तीय सहायता और पात्रता मदद - सरकार ने 2 अप्रैल 2016 से 10 वर्षों के लिए भारतीय शिपयार्डों को वित्तीय सहायता देने का अनुमोदन 9 दिसंबर, 2015 को किया था। iii.स्वदेश निर्मित जहाजों और आयातित जहाजों के बीच समानता - सरकार ने 24 नवंबर, 2015 को देश में निर्मित जहाजों और आयातित जहाजों के बीच समानता उपलब्ध कराने के लिए जहाजों के निर्माण में प्रयुक्त सामग्रियों पर उत्पादन और सीमा शुल्क को माफ कर दिया गया है। iv.भारतीय पोत कारखाने के लिए कारोबार करना आसान - सरकार ने 24 नवंबर, 2015 सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 65 के अधीन सीमा शुल्क नियंत्रण के तहत लाभ उठाने के लिए शुल्क मुक्त आयात या जहाज निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की घरेलू खरीद के तहत शिपयार्ड संचालित करने के लिए छूट दी है। v.तटीय मार्ग के माध्यम से कंटेनरीकृत कार्गो की ढुलाई को बढ़ावा देना - सरकार ने 17 सितंबर, 2015 को सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद छूट दी गई है। इस कर प्रोत्साहन से तटीय परिवहन की परिचालन लागत में कमी आएगी और भारतीय माल की ढुलाई को प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ भारत में परिवहन केंद्र के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। vi.भारतीय बाजार में विशेष जहाजों की उपलब्धता को बढ़ावा देना - सड़कों, रेलवे और अंतर्देशीय जल परिवहन में भीड़ के कम करने और तटीय शिपिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 2 सितंबर, 2015 को रोल-ऑन रोल-ऑफ (रो-रो), हाइब्रिड रोल-ऑन रोल-ऑफ (हाइब्रिड रो-रो), शुद्ध कार वाहकों, शुद्ध कार और ट्रक वाहकों, एलएनजी जहाजों और ओवर-आयामी कार्गों या परियोजना कार्गों वाहकों पांच साल की अवधि के लिए अनुतट यात्रा में छूट दी है। vii.भारतीय झंडा जहाजों विदेशी झंडा जहाजों पर कार्यरत भारतीय नाविकों में समता लाना - सरकार ने भारतीय झंडा जहाजों विदेशी झंडा जहाजों पर कार्यरत भारतीय नाविकों में कर व्यवस्था में समानता का समावेश किया है और यह आदेश भी दिया है कि उनकी भारत में ठहरने की अवधि की गणना उनके सतत निर्वहन प्रमाणपत्र में (सीडीसी) में की गई प्रविष्टियों के अनुसार की जाएगी। viii.प्रकाश देय राशि के संग्रह और आकलन को सरल बनाना - प्रकाश देय राशि के ई-भुगतान को 5 मई, 2015 से लागू किया गया है। प्रकाश देय राशि की वसूली के लिए एक सरल कार्यप्रणाली 26 नवंबर, 2014 को पहले ही अपनाई जा चुकी है। ix. भारतीय तट में काम कर रहे भारतीय झंडा जहाजों और भारतीय ड्रेजरों के लिए राइट ऑफ फस्ट रिफ्यूजल (आरओएफ़आर) को अबाधित करना - को मजबूत बनाने और एक प्रतिस्पर्धी ढांचे में भारतीय शिपिंग और ड्रेजिंग उद्योग को बढ़ावा देने की सरकार की नीति के ध्यान में रखते हुए सरकार ने 26 मार्च, 2015 को, भारतीय झंडा जहाजों के लिए राइट ऑफ फस्ट रिफ्यूजल (आरओएफ़आर) के दायरों को बढ़ाया है। इससे भारतीय झंडा पोतों के साथ ही ड्रेजरों को भी और अधिक व्यापार प्राप्त करने में मदद मिलेगी। x.पोत मरम्मत इकाइयों के पंजीकरण के लिए प्रक्रिया का सरलीकरण - देश में जहाज की मरम्मत के व्यापार के माहौल को सरल बनाने के लिए सरकार ने 13 फरवरी, 2015 को पोत मरम्मत इकाइयों के पंजीकरण के लिए प्रक्रिया को सरली बनाया है। इससे अधिक जहाज मरम्मत इकाइयों को स्थापति करने के साथ-साथ अधिकतम रोजगार जुटाने में मदद मिलेगी। xi.जहाज निर्माण के प्रयोजनों के लिए जहाजों को तोड़ने से प्राप्त रि-रोल्ड इस्पात का उपयोग - नौकाओं, नदी समुद्र पोतों (आरएसवी 1 और 2 टाइप) और बंदरगाह जहाजों के निर्माण की लागत कम करने के लिए और जहाज और नाव निर्माताओं की स्टील की मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने फरवरी 2018 में जहाजों तोड़ने से प्राप्त रि-रोल्ड इस्पात को इन पोतों के निर्माण में उपयोग करने के लिए प्रमाणित करने का निर्णय लिया। xii. कानूनी प्रतिमान सरल एम एस अधिनियम 1958 के अधीन 67 में से 13 नियमों को निरस्त कर दिया गया है। मसौदा मर्चेंट शिपिंग बिल को परिपत्रित किये जाने के अधीन है। xiii.मंजूरी देने के लिए ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देना - § चार्टर के लिए अपेक्षित शुल्क ई-भुगतान हेतु चार्टर संबंधि मंजूरी के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा 8 दिसंबर, 2015 को शुरू की गई थी। § मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर लाइसेंस और ऑपरेटरों के लिए अपेक्षित शुल्क के ई-भुगतान के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा 30 नवंबर 2015 से शुरू की गई है। § नया सीडीसी जारी करने और सीडीसी के नवीकरण / प्रतिस्थापन / डुप्लीकेट प्राप्त करने के लिए अपेक्षित शुल्क के ई-भुगतान के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा 15 जून 2015 से शुरू की गई है। § जहाज मालिकों के लिए अपेक्षित शुल्क के ई-भुगतान और पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन के लिए सुविधा 20 मार्च 2015 से शुरू की है। § योग्यता परीक्षाओं के प्रमाण पत्र के लिए आवेदन और आकलन की ऑनलाइन सुविधा 12 जनवरी, 2015 से शुरू की गई है।

 Seeing our scholar defending his PhD thesis during ODC was a great moment. This was the result of his hard work. Dr. Sanjay Singh, a senior...