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शुक्रवार, 28 जून 2019
रविवार, 7 अप्रैल 2019
Quote of The Day
Honesty without anything is more than Everything!
Trust with Transparency is equivalent to Honesty!!
Everything minus Honesty is equivalent to Zero!!!
-
Dr. R. Prakash
गुरुवार, 24 जनवरी 2019
वक्त से सामना
मैंने कहा तू कौन है
उसने कहा
मैं वक्त हूं
इसलिए तेरे साथ हर वक्त हूं
रात की गहराई मैं दोपहर की परछाई मैं
सुबह की अलसाई मैं और शाम की अंगराई मैं
इसलिए मैं वक्त हूं, हर वक्त हूं
मैंने कहा है सख्त तू कमबख्त तू, बेवक्त तू
मैंने कहा तू जा अभी मिलूंगा तुमसे फिर कभी
उसने कहा अगर मैं गया तो तू नहीं रह पाएगा
संग मेरे इस जहां से तू भी चला जाएगा।
वक्त की ये बात सुनकर मैं तनिक घबरा गया
कर्म को साथी बना फिर वक्त से टकरा गया
मैंने कहा ये वक्त सुन, बेवक्त है आना तेरा
कर्म की पतवार से पाला नहीं तेरा पड़ा
वक्त पलटा, मुस्कुराया, घूरकर उसने कहा
धर्म का हूं मर्म मै और कर्म का पतवार मैं
जिंदगी की नाव मै और हूं नदी की धार मैं
सुख में हूं मैं, दुख में हूं मैं, तू वक्त को पहचान ले
इस जहां में मुझसे बड़ा नहीं है कोई जान लें
वक्त के बदलने का अर्थ नहीं जानता
तू है नादां और भोला वक्त को नहीं पहचानता
तन्हाई मैं, बेवफाइ मैं, रुसवाई मैं, मिलन की परछाई मैं
कुदरत का कहर भी मैं, इश्क का असर भी मैं
प्यार का ज़हर भी मैं और मौत का जिगर भी मैं
मैंने कहा इक बात सुन, अहसास सुन, जज्बात सुन
अहसास को महसूस कर,ना जा तू मुझसे रूठ कर
उसने कहा मैं वक्त हूं, जज्जाबी नहीं मैं सख्त हूं
कलयुग का कर्म मैं, सतयुग का धर्म मैं
मनमीत मैं, संगीत मैं, हार मैं और जीत मैं
पूजा भी मैं, अर्चना भी मैं, आराध्य वंदना भी मैं
नीलांचन और विन्ध्यांचल मैं, गीता और कुरान भी मैं
इसलिए तेरे साथ हर वक्त हूं
रात की गहराई मैं दोपहर की परछाई मैं
सुबह की अलसाई मैं और शाम की अंगराई मैं
इसलिए मैं वक्त हूं, हर वक्त हूं
मैंने कहा है सख्त तू कमबख्त तू, बेवक्त तू
मैंने कहा तू जा अभी मिलूंगा तुमसे फिर कभी
उसने कहा अगर मैं गया तो तू नहीं रह पाएगा
संग मेरे इस जहां से तू भी चला जाएगा।
वक्त की ये बात सुनकर मैं तनिक घबरा गया
कर्म को साथी बना फिर वक्त से टकरा गया
मैंने कहा ये वक्त सुन, बेवक्त है आना तेरा
कर्म की पतवार से पाला नहीं तेरा पड़ा
वक्त पलटा, मुस्कुराया, घूरकर उसने कहा
धर्म का हूं मर्म मै और कर्म का पतवार मैं
जिंदगी की नाव मै और हूं नदी की धार मैं
सुख में हूं मैं, दुख में हूं मैं, तू वक्त को पहचान ले
इस जहां में मुझसे बड़ा नहीं है कोई जान लें
वक्त के बदलने का अर्थ नहीं जानता
तू है नादां और भोला वक्त को नहीं पहचानता
तन्हाई मैं, बेवफाइ मैं, रुसवाई मैं, मिलन की परछाई मैं
कुदरत का कहर भी मैं, इश्क का असर भी मैं
प्यार का ज़हर भी मैं और मौत का जिगर भी मैं
मैंने कहा इक बात सुन, अहसास सुन, जज्बात सुन
अहसास को महसूस कर,ना जा तू मुझसे रूठ कर
उसने कहा मैं वक्त हूं, जज्जाबी नहीं मैं सख्त हूं
कलयुग का कर्म मैं, सतयुग का धर्म मैं
मनमीत मैं, संगीत मैं, हार मैं और जीत मैं
पूजा भी मैं, अर्चना भी मैं, आराध्य वंदना भी मैं
नीलांचन और विन्ध्यांचल मैं, गीता और कुरान भी मैं
सोमवार, 10 जुलाई 2017
पीएम मोदी के नेतृत्व में देश में पुनर्जागरण का नया दौर
‘मन की बात-रेडियो पर सामाजिक क्रांति’ पुस्तक पर IGNCA में हुई लंबी परिचर्चा
रेडियो पर अपने मन की बात के जरिये प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने पूरे देश को एकसूत्र में बांध दिया है। दिल्ली के इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र-IGNCA में ‘मन की बात- रेडियो पर सामाजिक क्रांति पुस्तक’ पर परिचर्चा में सभी वक्ता इस बात पर सहमत दिखे। वरिष्ठ पत्रकार और IGNCA के चेयरमैन रामबहादुर राय ने कहा कि देश में स्वामी विवेकानंद की धारा से पुनर्जागरण का एक दौर शुरू हुआ था जिससे हमें आजादी मिली थी और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पुनर्जागरण का एक नया दौर है जो देश को एक नये सांचे में गढ़ने वाला साबित होगा। राम बहादुर राय ने कहा कि पीएम मोदी के मन की बात पर लिखी गई पुस्तक को पढ़ने के बाद उन्हें IGNCA में इस पर परिचर्चा की आवश्यकता महसूस हुई।
इस परिचर्चा को तीन हिस्सों में रखा गया था जिनमें तीन विषय संस्कार और जागरूकता, देश और दिशा और समाज और संदेश पर साहित्य, कला, शिक्षा, चिकित्सा और पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ीं कई जानी-मानी हस्तियों ने अपनी-अपनी बातें रखीं। मशहूर लोकगायिका और पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात का असर कुछ ऐसा है जिसे घटते हुए नहीं देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि मन की बात पारिवारिक और सामाजिक संस्कार को नये सिरे से स्थापित कर रही है जो देश की भावी पीढ़ियों को भी संजोने का काम करेगी। आज तक के एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) और सीनियर न्यूज एंकर सईद अंसारी ने कहा कि पीएम मोदी ने देश में संवादहीनता की खाई को भरा है। सईद ने कहा कि सबसे बड़ी बात ये है कि समाज के आखिरी छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन में भी मन की बात से सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। पहले सत्र में एम्स के पूर्व निदेशक तीरथ दास डोगरा ने मन की बात से जुड़ी पीएम की उस सलाह का जिक्र किया जो उन्होंने नशे की बुरी लत को लेकर दी थी। डोगरा ने कहा कि पीएम सामाजिक बुराई से जुड़े इस मुद्दे पर इस तरह से बात रखते हैं जिस तरह से एक मनोवैज्ञानिक भी नहीं रख सकता। वहीं न्यूज 18 चैनल के डिप्टी मैनेजिंग एडिटर सुमित अवस्थी ने कहा कि पीएम के मन की बात की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इसने हमारी सांस्कारिक चेष्टा को जगाने का काम किया है। प्रख्यात शास्त्रीय नृत्यांगना और पद्मविभूषण सोनल मान सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारवासियों के अंदर स्वाभिमान को भरकर उनकी पीठ को सीधा करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि मन की बात करते हुए पीएम मोदी एक भाई, मित्र, पिता और अभिभावक हर तरह की भूमिका में नजर आते हैं।
परिचर्चा के दूसरे सत्र में एमएफटी के डायरेक्टर संदीप मारवाह मन की बात पर बात करते हुए काफी जोश में नजर आए और कहा कि पीएम मोदी से बिना मिले भी लोग उनसे चिट्ठी-पत्री और मेल के जरिये अपनी बातें शेयर कर सकते हैं और पीएम उस पर जिस तरह से रिस्पॉन्स लेते हैं उसकी दूसरी कोई मिसाल नहीं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से स्वच्छता अभियान को पीएम मोदी ने पहली प्राथमिकता दी वो देश के लिए उनके संपूर्ण समर्पण के भाव को जाहिर करता है। वहीं सहारा आलमी चैनल के हेड लईक रिजवी ने कहा कि मन की बात ने देश की बेहतरी के लिए पीएम मोदी की उत्कट इच्छाशक्ति को जाहिर किया है। एम्स से संबद्ध डॉ. प्रसून चटर्जी ने कहा कि मन की बात में स्वास्थ्य के मुद्दों को लेकर पीएम मोदी की सलाह मेडिकल साइंस के मापदंडों पर भी हर तरह से खरी उतरती है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर और पद्मश्री दिनेश सिंह ने मन की बात में स्टार्टअप को लेकर पीएम मोदी के आह्वान का खास जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब शिक्षण संस्थान औपचारिक डिग्री की पढ़ाई से आगे निकले और उस दिशा में बढ़े जहां सिर्फ नौकरी के लिए नहीं, बल्कि व्यवसाय के लिए भी पढ़ाई पर जोर हो।
परिचर्चा के तीसरे और आखिरी सत्र में IGNOU के वाइस चांसलर प्रो. रविंद्र कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में भारतीयता की पुनर्प्रतिष्ठा स्थापित होनी शुरू हुई है। परिचर्चा में अपनी बात रखते हुए इडिया न्यूज के मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात लीक से हटकर है और इसलिए लोगों का पर उसका गहरा प्रभाव भी देखा जा रहा है। एनबीटी के चेयरमैन बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि भारत के मन को पकड़ने का पहली बार किसी ने प्रयास किया है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने।
परिचर्चा का संचालन वरिष्ठ पत्रकार और कई पुस्तकों के लेखक हरीश चंद्र बर्णवाल ने किया जिन्होंने प्रस्तावना रखते हुए कहा कि मन की बात रेडियो पर प्रसारित होने वाला एक ऐसा कार्यक्रम है जिसके बारे में देश के 90 प्रतिशत से ज्यादा लोग जानते हैं। उन्होंने पीएम के मन की बात को अपनी किताब मोदी सूत्र की उस लाइन के साथ जोड़ा कि ये अंधेरे में चलते इंसान के लिए एक मशाल है।
इस पुस्तक की प्रस्तावना जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे द्वारा लिखी गई है। लोगों में मन की बात को लेकर कुछ स्वाभाविक जिज्ञासाएं रही हैं…जैसे कैसे प्रधानमंत्री को इसका आइडिया आया,कैसे इसका नाम तय हुआ, यह कैसे तय हुआ कि यह कार्यक्रम कितने अंतराल पर होना चाहिए,इसकी रूपरेखा क्या हो? लोगों की ऐसी ही कई जिज्ञासाओं को ध्यान में रखते हुए ‘मन की बात – रेडियो पर सामाजिक क्रांति’ पुस्तक लिखी गई है। ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन द्वारा लिखी गई इस पुस्तक को LexisNexis ने प्रकाशित किया है।
शुक्रवार, 3 मार्च 2017
भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य फेस्टिवल 'स्मृतियां'
तबले की थाप...घुंघरू की खनक...और वीणा के सुर...संगीत से सजी ये महफिल तबला के महान उस्ताद पंडित चतुर लाल की याद में आयोजित की गई है।
दरअसल यहां मौजूद हर कलाकार ने अपनी साज के जरिए संगीत के इस महान विभूति को सच्ची श्रद्धांजलि दी। दो दिनों के इस कार्यक्रम में पंडित चतुर लाल की याद में संगीत के साधकों ने अपने परफॉरमेंस के जरिए सभागार में मौजूद लोगों का मन मोह लिया। कलाकारों ने अपनी कला के जरिए मंच पर शास्त्रीय संगीत और नृत्य की ऐसी धारा बहाई, मानों संगीत और नृत्य का ऐसा संगम शायद ही पहले कहीं और देखने को मिला हो।
पंडित सलिल भट्ट के वीणा के सुर हो, या फिर नृत्यांगना गरिमा आर्य के तबले की थाप पर थिरकते कदम। हर कलाकार संगीत की अपनी साधना के जरिए तबला के सूरमा रहे पंडित चतुर लाल की याद ताजा करने की भरपूर कोशिश कर रहा था।
प्रांशु चतुरलाल ने भी अपने परफॉरमेंस के जरिए संगीतप्रेमियों को झूमने पर मजबूर कर दिया। सितार के धुन और राग की बदौलत गौरव मजूमदार ने लोगों को संगीत की गहराइयों में डूबकी लगाने पर मजबूर कर दिया। राग बिहाग से लेकर तीन ताल में राग किरवानी को उन्होंने कुछ इस अंदाज में पेश किया कि मानों संगीत का ये रंग सबके दिलों में उतर गया हो।
तबला के उस्ताद पंडित चतुर लाल की याद में भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य फेस्टिवल 'स्मृतियां' का आयोजन पंडित चतुरलाल मेमोरियल सोसाइटी ने किया था।
पंडित सलिल भट्ट के वीणा के सुर हो, या फिर नृत्यांगना गरिमा आर्य के तबले की थाप पर थिरकते कदम। हर कलाकार संगीत की अपनी साधना के जरिए तबला के सूरमा रहे पंडित चतुर लाल की याद ताजा करने की भरपूर कोशिश कर रहा था।
प्रांशु चतुरलाल ने भी अपने परफॉरमेंस के जरिए संगीतप्रेमियों को झूमने पर मजबूर कर दिया। सितार के धुन और राग की बदौलत गौरव मजूमदार ने लोगों को संगीत की गहराइयों में डूबकी लगाने पर मजबूर कर दिया। राग बिहाग से लेकर तीन ताल में राग किरवानी को उन्होंने कुछ इस अंदाज में पेश किया कि मानों संगीत का ये रंग सबके दिलों में उतर गया हो।
तबला के उस्ताद पंडित चतुर लाल की याद में भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य फेस्टिवल 'स्मृतियां' का आयोजन पंडित चतुरलाल मेमोरियल सोसाइटी ने किया था।
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छपाई एक कलाकृति है। यह प्रारंभिक चित्र के समान प्रकार में लगभग विविधता की अनुमति देती है। भारत में छपाई का इतिहास 1556 से शुरू होता है। इस य...
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राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इस योजना की शुरूआत 1969 में की गई थी और इसका प्राथमिक उद्देश्य स्वैच्छिक सामु...