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शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014
नदियों में प्रदूषण का बढ़ता दायरा
केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) विलीन आक्सीजन ओडी, जैव-रासायनिक आक्सीजन बीडीओ एवं फिकल कालिफोर्म्स आदि के लिए 383 नदियों की 1085 स्थानों पर जल गुणवत्ता की निगरानी कर रहा है। बीओडी स्तर के आधार पर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 150 प्रदूषित फैलाव की पहचान की है। केन्द्र सरकार ने गौमुख से उत्तरकाशी तक भागीरथी नदी के फैलाव को पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र के रूप में घोषित करने के लिए पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत दिनांक 01.07.2011 को प्रारूप अधिसूचना जारी की है। यह प्रारूप मंत्रालय की वेबसाइट पर डाल दिया गया है, जिस पर प्रकाशन की तिथि से 60 दिनों के अंदर टिप्पणियों एवं सुझावों को आमंत्रित किया गया । नदियों का संरक्षण सामूहिक प्रयास है। यह मंत्रालय राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एनआरसीपी) के अंतर्गत नदियों के प्रदूषण का उपशमन करने के लिए राज्य सरकारों के प्रयासों को आगे बढ़ा रहा है। राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के अंतर्गत वर्तमान में 20 राज्यों के 185 शहरों में 39 नदियों के प्रदूषित फैलाव शामिल हैं। गंगा कार्य योजना (जीएपी) 1985 में शुरू की गयी थी बाद में एनआरसीपी के अंतर्गत अन्य मुख्य नदियों को शामिल करके इसका विस्तार किया गया। शुरू की गयी प्रदूषण उपशमन योजनाओं में अवरोधन, विचलन एवं दूषित पानी का शोधन एवं कम लागत के सफाई कार्य आदि शामिल हैं। इन योजनाओं के अंतर्गत 4729 करोड़ रूपये व्यय करके अभी तक 4417 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) की दूषित जल शोधन क्षमता का निर्माण किया गया है। केन्द्र सरकार ने समग्र पहुंच को अपना कर गंगा नदी के संरक्षण के लिए एक सशक्त प्राधिकरण के रूप में फरवरी 2009 में राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (एनवीबीआरए) का गठन किया था। प्राधिकरण ने यह निर्णय लिया है कि गंगा सफाई मिशन के अंतर्गत 2020 तक यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गंगा में बिना शोधन किए गए नगर पालिका क्षेत्र के एवं औद्योगिक निस्सारणों को गंगा में न बहने दिया जाए।
जल-मल प्रबंधन एवं निस्तारण हेतु अवसंरचना सृजन भी अन्य केन्द्रीय योजनाओं जैसे जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन और छोटे एवं मध्यम शहरों के लिए शहरी अवसंरचना विकास योजना के साथ-साथ राज्य योजनाओं के अंतर्गत योजनाओं के माध्यम से किया जा रहा है। सीपीसीबी ने यह पहचान की है कि वीडीओ मानदंड 30 मि.ग्रा./लीटर से अधिक हो रहा है। अट्टावा चोय अडयार, अम्लाबाड़ी, भीमा, भ्रालु, भोगावो, कुबम, कावेरी, चन्द्रभागा, चम्बल, दमन गंगा, गोमती, गंगा, गोदावरी, घग्गर, डिंडन, इन्द्रायणी, कालोग, कुण्डालिका, खान कोयना, काली नदी पूर्वी, मूसी, पुला एवं मूथा, मीठी, मारकण्डा, नक्कावागु, नीरा, पटियाला की राव, पवाना, रामगंगा, सुखना चोय, सतलुज, साबरमती, वेन्ना नदी, पश्चिमी यमुना नहर, पश्चिमी काली, (आंशिक रूप से शामिल) एवं यमुना नदियों के 35 फैलावों में सभी अवसरों पर बीडीओ 6 मि.ली./लीटर से अधिक रहता है।
15 फैलावों में सभी अवसरों पर मानदंड 6 मि.ग्रा./लीटर से अधिक होकर 20-30 मि.ग्रा./लीटर है। ये नदियां हैं – वागड, भादरा, बहाला बान्दी, बरेच, घेला एवं किच्छा, गिरना, जोजारी, खेतड़ी, कोसी, खारी, कोलक, मिन्ढोला, नीरा, नोय्यल, नाम्बुल एवं तापी।
अगरतला नहर, भीका, डियर बिल, गंगा, गुडगावां नहर, क्षिप्रा, कृष्णा, करमाना, लक्ष्मण तीर्थ, मंजिरा, नर्मदा, पूरणा, शेदी, सुबर्णरेखा, टुन्गा, तुंगभद्रा, विएन गंगा एवं वर्धा में सभी अवसरों पर 26 फैलावों में मानदंड 6मि.ग्रा./लीटर से अधिक 10-20 मि.ग्रा.-लीटर हो रहा है। 38 स्थानों पर बीडीओ मानदंड 6-10 मि.ग्रा./लीटर रहता है। ऐसी नदियां हैं – अरासालार, अर्पा, बेतवा, व्यास, भावनी, बुरहीडिहिंग, चम्बल, कावेरी, दामोदर, धादर, गंगा, गोदावरी, कालीं किम कालीसोट, कालू, कन्हन, कोलार, कृष्णा, काठजोड़ी, खारखाला, माही, मारकंडा, नर्मदा, पंचगंगा, पाताल गंगा, रंगावली, सॉख, सिकराना, सिवनाथ, ताम्बिरापरानी, उम्तरेव, उल्हास, वैगई, तापी एवं टोन्स।
अनास, आम्बिका, अरकावती, बालेश्वर खाड़ी, बाराकर, ब्राहमणी, भत्सा, डिक्चू,ध्नश्री हेवरा, हुन्द्री, कुन्डू, कदमबयार, कुआखाई, कावेरी, कृष्णा, मानेर, मालप्रभा, मानेखोला, माही, महानदी, तीस्ता, मंदाकिनी, नर्मदा, पालर, पेन्नार, पनाम, पुझककाल, रिहन्द, रानिचू, साबरमती, सरयू, तुंगभद्रा, उल्हास एवं यमुना नदियों में ऐसे अन्य 36 फैलाव हैं जहां बीडीओ मानदंड 3-6 मि.ग्रा./लीटर रहता है।
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