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गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014
सिक्कों के निर्माण से जुड़ी अहम जानकारी
·18वीं सदी- कलकत्ता टकसाल में सिक्कों का निर्माण शुरू हुआ। 1790 में इंगलैंड से आधुनिक मशीनरी लाई गयी और दूसरी टकसाल की स्थापना की गई। इन टकसालों से कांस्य, चांदी और सोने के सिक्के बनाये जाने लगे।
·1918- मुंबई टकसाल को लंदन की राॅयल मिन्ट टकसाल की शाखा घोषित करते हुए 1918 में ब्रिटिश स्मारक बनाए गए।
·1925- नासिक में पोस्टल स्टेशनरी और डाक टिकटों का मुद्रण शुरू हुआ।
·1928- नासिक में करंसी/बैंक नोटों का मुद्रण प्रारंभ हुआ।
·1929 के बाद- विभिन्न प्रकार के अन्य प्रतिभूति उत्पाद इसमें जुड़ गए।
·1962 - 1/- रु. के नोट का मुद्रण नए स्थान पर प्रारंभ हुआ।
·1967 - प्रतिभूति विनिर्माण मिल ने होशंगाबाद (मध्यप्रदेश) ने काम करना शुरू कर दिया।
·1974 - देवास (मध्यप्रदेश) में एक नयी प्रेस स्थापित की गई, जिसमें प्रिंटिंग मशीनों की सभी श्रेणियां लगाई गयी ताकि अधिक मूल्य के बैंक नोटों की प्रिन्टिंग पर ध्यान दिया जा सके, जिसमें ‘‘इनटैगलियो प्रिन्टिंग टैक्नाॅलोजी और गिलोटिन मशीनों‘‘ का इस्तेमाल बैंक नोटों के प्रोसेसिंग कार्यों के लिए किया गया। बैंक नोट प्रेस, देवास में उच्च कोटि की प्रतिभूति स्याही का उत्पादन भी किया गया और उसे विभिन्न प्रतिभूति संगठनों को भेजा गया।
·1980 - सभी करंसी/बैंक नोटों की प्रिन्टिंग नए स्थान पर शुरू हुई।
·1982 - भारत सरकार द्वारा हैदराबाद में प्रथम प्रतिभूति प्रिन्टिंग यूनिट कायम की गई।
·1988 - भारत सरकार ने नोएडा (उत्तरप्रदेश में) स्वयं की प्रथम टकसाल की स्थापना की।
’’भारतीय प्रतिभूति मुद्रण एवं मुद्रा निर्माण निगम से प्राप्त जानकारी
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